बुधवार, 12 अगस्त 2020

अकेला चलने की पड़ी आदत है


!! अकेला चलने की पड़ी आदत है !!

प्रतिदिन सुनने की ,
हमें चाहत है ।
उनसे कहने में भी ,
हिचकिचाहट है ।
जिनका करते हैं ,
बेसब्र हो इन्तज़ार ,
वह तेरे कदमों की ,
अजीब आहट है ।।

क्या ?कहें ना कहने से ,
बड़ी राहत है ।
पता नहिं कौन ?
किसकी ? अमानत है ।
मिलें या ना मिलें ,
साथ चलने को राहों में ,
अब तो हमको भी "अनुज ",
अकेला चलने की पड़ी आदत है ।।

डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

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