गुरुवार, 27 अगस्त 2020

सुप्रसिद्ध कवयित्री सीमा गर्ग मंजरी जी द्वारा 'नारी' विषय पर रचना

नमन मंच 
नारी 
भारत की नारी --

हम भारत की नारी हैं,
नभगंगा में भी पगधारी हैं!
नाना काम संभाले हंसकर ,
हम दुर्गा की अवतारी हैं!
हम भारत की नारी हैं !!

भोर भये दिनचर्या आरम्भ ,
झाड़ू फटका से हो प्रारम्भ !
स्नान ध्यान संग रस रसोई,
स्वाद में नेह माधुरी वारी हैं!
हम भारत की नारी हैं!!

कपडे धोये प्रैस करें हम ,
सब्जी भाजी फ्रैश भरें हम !
संग मुन्ने को दूध पिलाती,
मोबाइल संग गपशप जारी है!
हम भारत की नारी हैं!!

आफिस जाये नोट कमाये,
लैपटॉप सम्भाले पाठ पढ़ाये!
नाना व्यंजन भोग बनाये ,
प्रेम भाव से जिमाने वारी हैं !
हम भारत की नारी हैं!!

नहीं कभी बल पेशानी पर ,
सहर्ष स्वीकार करें चुनौती!
आ जाये यदि कोई अतिथि,
भोजन रस बरसाने वारी हैं!
हम भारत की नारी हैं!!

पिया की अनुरागी साथी हैं,
दीया संग जैसे रहे बाती हैं!
एक दूजे से प्यारी खुशियाँ,
शहद चाशनी मीठी बतियाँ!
अभिसार आमन्त्रण वारी हैं!
हम भारत की नारी हैं!!

ममता प्रेम धैर्य संयम शक्ति,
आनंद उमंग मनहरण कृति!
रति भार्या सा प्रणय संगीत,
ललित ललाम हृदय की प्रीत!
साजन मन की अधिकारी हैं,
हम भारत की नारी हैं!!

नारी गुणों की अनुपम निधि है ,
विरंचि की सुघड़ रचना कृति है !
चरण कमल में लक्ष्मी की सिद्धि,
संघर्ष से मिली सच मशहूरी है!
हम भारत की नारी हैं!!

जिस घर हो नारी का सम्मान,
मन्दिर बने वह स्वर्ग समान!
आओ हम सब भी यह माने,
नारी शक्ति है जग उपकारी !
 भारत की नारी जग से न्यारी है !!

✍ सीमा गर्ग मंजरी
 मेरी स्वरचित रचना
 मेरठ

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