मंगलवार, 1 सितंबर 2020

'बदलाव मंच' कवि व समीक्षक भास्कर सिंह माणिक जी द्वारा 'लॉकडाउन में शिक्षकों की स्थिति' विषय पर रचना

बदला मंच को नमन
(बदलाव मंच राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय साप्ताहिक प्रतियोगिता )

विषय-

लॉकडाउन में शिक्षकों की स्थिति

यह विषय बहुत ही मार्मिक और उत्कृष्ट है।
सरकारी शिक्षकों को छोड़कर प्राइवेट विद्यालयों के शिक्षक के बारे में जितना भी कहा जाए कम होगा क्योंकि प्राइवेट शिक्षक लॉकडाउन के कारण भुखमरी की कगार पर आकर खड़े हो गए। आज मजदूर से भी बदतर हालत प्राइवेट शिक्षकों की है कुछ शिक्षक तो मजबूरी में मजदूरी के लिए भी जाने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा कारण है प्राइवेट  विद्यालयों ने अपने ही लगन शील कर्मठ शिक्षकों को जीवोपार्जन के लिए सहयोग करने के लिए हाथ खड़े कर दिए। ऐसी स्थिति में शिक्षक कहा जाए पढ़ लिख कर डिग्री तो हासिल कर ली लेकिन परिस्थितियों ने साथ नहीं दिया। प्राइवेट विद्यालयों ने उन्हें अंगीकार किया अल्प धनराशि में पढ़े लिखे होशियार विद्वान प्राइवेट विद्यालयों में शिक्षण कार्य के लिए जुड़ गए।
जबकि शिक्षक को समाज का दर्पण कहा जाता है उसका शोषण आज भी हो रहा है। वह अपने उदर पोषण के लिए परिवार संरक्षण के लिए दर बदर भटक रहा है। सरकार ने भी प्राइवेट शिक्षकों की और कोई ध्यान नहीं दिया ना ही उनके भरण-पोषण के प्रति कोई आदेश जारी किया आश्चर्य इस बात का है हमारे समाज के कुछ धनवान बड़े-बड़े विद्यालय खोलकर प्राइवेट शिक्षकों पर शासन करते हैं।
जहां तक सरकारी शिक्षक की बात है सरकारी शिक्षकों को लॉकडाउन के कार्यकाल में कुछ राहत महसूस हुई इसका भी बहुत बड़ा कारण है आज हमारी सरकार ने शिक्षक को रसोईया बना रखा है। जनगणना जैसे कार्यों में सरकारी शिक्षक को जिम्मेदारी सौंप दी जाती है इससे भी लॉक डाउन में सरकारी शिक्षक को बड़ी राहत प्राप्त हुई।
सरकारी शिक्षक को जीविकोपार्जन  पल भर भी परेशानी मेरी दृष्टि में नहीं हुई। लेकिन चिंता जरूर बड़ी , भविष्य में क्या होगा छात्र छात्राओं को किस तरह अच्छी और सही शिक्षा दी जा सके। जबकि आज कुछ सरकारी और कुछ प्राइवेट विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षण कार्य प्रारंभ हो चुका है परेशानी इस बात की है जो छात्र के परिवार संपन्न है उन्हें यह शिक्षा बहुत आसान है लेकिन जो विपन परिवार हैं उनके लिए यह शिक्षा आसमान से तारे तोड़ने के समान है।
आज हमारे समाज के रहनुमाओं को इस पर चिंतन करना होगा। शिक्षा से हमारे गरीब परिवार के बच्चे वंचित ना रह जाए इसके लिए शिक्षक को सरकार तक यह बात पहुंचाने होगी।
वैसे तो लाकडाउन से शिक्षक ही नहीं पूरा देश प्रभावित हुआ है।
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मैं घोषणा करता हूं कि यह विचार मौलिक स्वरचित है।
भास्कर सिंह माणिक,कोंच

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