शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

मुक्तक#प्रकाश कुमार मधुबनी#

स्वरचित रचना
तभी तो कहते है साहब
 प्यार बावला होता है।
जख्म एक को होता है
 जबकि रोता दूजा है।।
यदि यकीन नही हो तो 
नजर दौड़ा के देख लो।
चैन किसी का खोता है,
सुकून में सोता दूजा है।।

प्रकाश कुमार मधुबनी

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