बुधवार, 9 सितंबर 2020

कवयित्री नीतू राठौर जी द्वारा मधुर रचना....

कौन कहता है कि यादों से कभी तर कर दे
फूल कहो चाँद कहो शाम तो बेह्तर कर दे।

चाँद एक वो है तो एक चाँद मैं हूँ तेरे लिए
रूप दे रंग दे"नीतू " आँखों को समंदर कर दे।
नीतू राठौर

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