सोमवार, 21 सितंबर 2020

कवि निर्मल जैन 'नीर' जी द्वारा 'फिसलती जबान..' विषय पर रचना

फिसलती जबान..
*******************
प्रेम से बोल~
सबके हृदय में
अमृत घोल
जीभ रसीली~
कभी मत बनाना
तू  ज़हरीली
बनो सरल~
फिसलती ज़बान
होती गरल
शब्दों के तीर~
तन पे घाव करे
अति गम्भीर
द्वार तू खोल~
अमृतमयी वाणी
तोल के बोल
*******************
निर्मल जैन 'नीर'
ऋषभदेव/उदयपुर
राजस्थान

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें