शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2020

कवि डॉ.सत्यम भास्कर भ्रमरपुरिया जी द्वारा रचना “खता गर हमसे हुई तो"

खता गर हमसे हुई तो, 
हम हैं आपके गुनहगार, 
दिल जो दुखाया तो, 
खतावार हूँ मैं आपका, 
छेड़ जो दिया कभी आपको, 
दिल पे न लेना ऐ सनम, 
दिया जो कोई गम कभी, 
कर देना उसे अलविदा, 
अर्जी है मेरी इतनी सी, 
ऐ मल्लिका -ए -हुश्न, 
अदावत है बेमिशाल, 
कुदरत की अनोखी काया, 
शीतल छांव, जुल्फों में समाया, 
दे दो फिर वही मुस्कुराहट, 
बंदा ए आशिक को वही चाहत।

*डॉ सत्यम भास्कर भ्रमरपुरिया*
*अंतरराष्ट्रीय सचिव बदलाव मंच*

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