रविवार, 15 नवंबर 2020

निर्मल जैन 'नीर' जी द्वारा बेहतरीन रचना#

माता-पिता...
(सायली छंद)
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सदैव
रहे आशीष 
माता पिता का
कभी बिछड़े
नही
लुटाते
सारा प्यार
मात-पिता से
हमें मिलते
संस्कार
कोई
नही मोल
माता-पिता होते
जीवन में
अनमोल
होते
मात-पिता
जीवन के आधार
फिर क्यों
लाचार
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निर्मल जैन 'नीर'
ऋषभदेव/उदयपुर
राजस्थान

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