रविवार, 17 जनवरी 2021

कवि, एड किशन सननमुखदास जी द्वारा अद्वितीय रचना# वर्ष दो हजार इक्कीस#

दो हज़ार बीस- दो हज़ार इक्कीस

स्वागत किए थे जोरदार से वर्ष
 2020 तुम्हारा
पता नहीं था ऐसा बुरा हाल करोगे हमारा

बजाए ढोल पताशे फोड़े बम, आगाज किए करारा
झलक देखे तुम्हारी परिवार संग, रात 12 बजे तुम्हें दुलारा
हम युवा बूढ़े बच्चों का, ध्यान नहीं रखा तुमने हमारा
आर्थिक रूप से कमर तोड़, कर दिया बिल्कुल किनारा

स्वागत किए थे जोरदार से, वर्ष 2020 तुम्हारा
पता नहीं था ऐसा, बुरा हाल करोगे हमारा

 माननीय वर्ष 2021 तुम, खुशहाल करना पूरा वर्ष हमारा
खुशी ऐसी देना भूल जाएं कि, 2020 ने किया था हमें किनारा
सभी विपत्तियां परेशानियां, दुख दर्द दूर करना हमारा
खुशियों की ऐसी झड़ी लगाना, याद रखें 2021वर्ष तुम्हारा
मिसाल दे तुम्हारी हे 2021, ऐसी खुशियों का रंग बरसे तुम्हारा
भूल जाएं गम जो भरे 2020 ने,बस 2021 वर्ष याद रहे तुम्हारा
भरपूर स्वागत करेंगे 2021तुम्हारा, बस वर्ष भर देना खुशियों का सहारा

माननीय वर्ष 2021 तुम, खुशहाल करना पूरा वर्ष हमारा
खुशी ऐसी देना भूल जाएं कि, 2020 ने किया था हमें किनारा

*साहित्यकार, कर विशेषज्ञ, कानूनी लेखक, चिंतक, कवि, एड किशन सननमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र*

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