गुरुवार, 30 जुलाई 2020

किनारे-किनारे डगर ढूँढ़ लूँगा





किनारे-किनारे डगर ढूँढ़ लूँगा
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 मैं अपने लिए ,
एक नजर ढूँढ़ लूँगा ।
किनारे-किनारे ,
डगर ढूँढ़ लूँगा ।।
ना जाऊंगा फिर ,
भूल कर राह तन्हा ।
ऐसा सफ़र ,
हम-सफ़र ढूँढ़ लूँगा ।।
तम्हें छोड़ना है ,
मुझे छोड़ दो हँस ।
खुद के लिए ,
एक शहर ढूँढ़ लूँगा ।।
ना टूटे कभी ,
सोच कर बात दिल की ।
इतना बड़ा ,
वो जिगर ढूँढ़ लूँगा ।।
तुमको परेशान ,
ना देखूँ कभी मैं ।
हल चल लिये ,
एक लहर ढूँढ़ लूँगा ।।
मरने कभी नहीं,
दूं स्वप्न आशा ।
निराशाओं हेतु ,
जहर ढूँढ़ लूँगा ।।
हो नाज खुद पर ,
खुदा से भी ज्यादा ।
मैं खुद ही खुदा का ,
कहर ढूँढ़ लूँगा ।।
मैं अपने लिए ,
एक नज़र ढूँढ़ लूँगा ।
किनारे-किनारे ,
डगर ढूँढ़ लूँगा ।।

डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज "
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

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