सोमवार, 3 अगस्त 2020

होलियां खून की खेलीं‌, गोलियां सीने पे खाईं हैं। इस अनमोल दौलत की बड़ी कीमत चुकाई है।


बदलाव मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता
विषय- 'स्वतन्त्रता दिवस' पर काव्य गद्य मिश्रित भाषण प्रतियोगिता

शीर्षक - भाषण

नाम  - डाॅ. अनीता तिवारी

विषय - स्वतन्त्रता दिवस पर काव्य गद्य मिश्रित भाषण प्रतियोगिता


होलियां खून की खेलीं‌, गोलियां सीने पे खाईं हैं।
इस अनमोल दौलत की बड़ी
कीमत चुकाई है।
लगा दी जान की बाजी 
तब कहीं आजादी पाई है।
बहा दी रक्त की नदियां
तब यह धरा मुक्त कराई है।।


आजादी हमें विरासत में नहीं मिली।इसे हमने अपने‌, त्याग ,पराक्रम और बलिदान के बल पर प्राप्त किया है।अनेक क्रांतिकारी  भारत को स्वतंत्र कराने के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए।तब कहीं आजादी का भास्कर निकला और हमने खुली हवा में सांस ली।

मत भूलो शहादत से लिखा है 
देश का इतिहास अपना।
बलिदानियों की शौर्य गाथा 
इसके कण - कण में मिली है।।

जब पराधीनता की बेड़ियां टूटतीं हैं ,तब हम अपनी अपनी गति, उड़ान व अपना आसमान तय करते हैं।

पराधीन सपनेहुं सुख नाहीं

पराधीन होकर हम कभी सुख को प्राप्त नहीं कर सकते।इसी सोच ने हमारे देश की तस्वीर बदली।
आजादी का इतिहास कभी काली स्याही नहीं लिख पाती,इसके लिए लाल स्याही चाहिए।
सन १८५७ की क्रांति हो,या क्रांतिकारियों के बलिदान, पन्द्रह अगस्त सन् १९४७ को देश आजाद हुआ। पराधीनता की बेड़ियां टूटीं।

भारत माता ने गर्व से कहा-

नीचे जमीं मैं ऊपर आसमान रखती हूं।
कण - कण में अपने बड़े बलिदान रखती हूं।
तुम झुका सकोगे न मुझको,
ए दुश्मनों देखो
मैं हूं भारत माता
 स्वाभिमानी हिन्दुस्तान रखती हूं।

भारत की माटी महान है।भारत को माता का संबोधन प्राप्त है। इसकी गौरवशाली परंपरा है।
जिसने आंख उठाया मिट गया।‌सोने की चिड़िया ,विश्व गुरु की उपाधि से विभूषित देश‌ जग सिर मौर बनेगा।
भारत कोई साधारण देश नहीं। यहां राणा का त्याग है, लक्ष्मीबाई का पराक्रम है। भगतसिंह , सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद व विस्मिल जैसे अनेक आजादी के परवाने व पन्ना का उत्सर्ग है ‌।भारत की माटी में जौहर है।

।रण बांकुरों की गूंज है-

लाल चेहरा है नहीं 
पर लाल हैं भारत के हम
सर कभी झुकते नहीं
ऐसे भाल हैं ,भारत के हम।।

तमाम देश मिट गए पर भारत की हस्ती मिटी नहीं। यहां के बालक सिंह के मुंह में हाथ डालकर दांत गिनने का साहस करते हैं।
यह वीर प्रसूता माटी धन्य है,   धन्य है यह पावन देवभूमि जहां गंगा बहती है।

जिस देश के सैनिक अपने कंधों पर बंदूकें रख सिंहनाद करते हों,जिनके हृदय में तिरंगा बसता हो ,वह देश कभी किसी के आधीन नहीं रह सकता।

हम सभी अपने कर्तव्य का पालन ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक करते रहें।
देश की एकता,अखंडता और संप्रभुता सदैव बनी रहे,यही स्वतन्त्रता दिवस की सच्ची सार्थकता होगी।

तेरा वैभव अमर रहे मां
हम दिन चार रहें न रहें।।


डॉ.अनीता तिवारी,भोपाल
Badlavmanch

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