रविवार, 2 अगस्त 2020

सप्ताहिक काव्य व गद्य मिश्रित स्वतन्त्रता दिवस भाषण प्रतियोगिता

बदलाव मंच
स्वरचित रचना
2/8/2020

सप्ताहिक काव्य व गद्य मिश्रित स्वतन्त्रता दिवस भाषण प्रतियोगिता


नमस्कार

देवीयों सज्जनों व माताओं बहनों व मेरे प्यारे साथियों मैं प्रकाश कुमार आप सभी का धन्यवाद करता हूँ कि आप सभी ने मुझे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुझे अपने भाव व्यक्त करने अवसर दिया मैं आप सभी को नमन वंदन व अभिनन्दन करता हूँ। 
जिस तिरंगे के खातिर हमारे 
विरो ने सर्व बलिदान दिया।
उस तिरंगे को नमन है।।

जिस धरा के सम्मान बचाने के 
लिये हमारे वीर सैनिको ने लहू का
कतरा कतरा दान दिया।
उस धरा को नमन है।।

जिसके स्वरूप को बचाने
 के लिए माताओं बहनों ने
 देश को सपूत महान दिया।
उस मातृत्व शक्ति को नमन है।।

देश के लिए मर मिटने वाले।
इसे अपने पसीने से सींचने वाले।
उन शूरवीर कर्मियों को नमन है।।

इन पंक्तियों के साथ मैं इस पुण्य भुमि को नमन करता हूँ। मैं नमन करता हूँ उन विरो को जो अपनी खुशियों को छोड़कर देश के लिए अपना हर कतरा दे गए। दोस्तों जैसे कि आप जानते है,हमारा देश लगभग 200 वर्षों से गुलामी के जंजीरों में जकड़ा हुआ था।
बहुत ही कठिन प्रयास के बाद कही जाकर हमें 14 व 15  अगस्त 1947 के मध्यरात्रि को आजादी मिली। यह इतना सहज भी नही था। इस आजादी को पाने के लिये हमारे लाखो देश के वीर जवानों ने बुजुर्गों ने अपनी जान न्योछावर कर दिया। किन्तु इस आजादी के लिए भी हमें अपने ही भारत माँ के सीने को दो टुकड़ा करना पड़ा। जो कि भारत व पाकिस्तान है। उस दिन पहले सुबह उठने पर आधे लोगों को ये तक पता नही था कि वो जहाँ है वो हिंदुस्तान है या पाकिस्तान। लाखों बहनों को ट्रेन से निकाल निकाल कर जबड़न उनसे बल्तकार किया गया। दोस्तों इनको बयाँ करने के लिये मेरे पास शब्द नही है। दोस्तों 
ये सब हमें इसलिए जानना है ताकि ये समझ सके कि आखिर क्या कारण थे  जिसके कारण हमारे देश को गुलामी के जंजीरों में जकड़ना   पड़ा दोस्तों इसका मुख्य कारण है हमारा देश कभी सोने का चिरिया कहलाता था और इस दौरान अंग्रेजों ने व्यापार के माध्यम से यहाँ अपना पैठ बढाया। वो यहाँ से सस्ते दामों पर 
खरीदकर अपने देश मे ऊँचे मुनाफे में बेक देते थे। फिर क्या था उन्होंने 1630 में यहाँ उन्होंने अपनी पहली ईस्टइंडिया कम्पनी की स्थापना की। फिर धीरे धीरे इस धरती को गुलाम बना लिया।फिर देखते ही देखते उन्होंने आर्थिक रूप से राजनीतिक रूप से व पूर्ण रूप से भारत को गुलाम बना लिया। हमारे देश देश में हमें जानवरों के जैसे अत्याचार किया जाता था। जिसे आजाद कराने के लिए हमारे देश के वीर युवा क्रांतिकारी जैसे सुभाष चंद्र,चन्द्र शेखर आजाद,भगतसिंह व सुखदेव, राजगुरू,व हजारों के तादाद में गुमनाम युवाओं ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। जिसके बाद सभी वर्गों के लोगों ने मिलकर अंग्रेजों को यहाँ से भागने पर मजबूर कर दिया। दोस्तों अतः हमें अपने देश को पूर्ण रूप से आजाद रखने के लिये यदि अपने अपने प्राणों की बलिदान भी करना पड़े तो हम तैयार है।साथियों ये हमारा सौभाग्य है क्योंकि हम 
भारत में पैदा हुए है जो की एक बहुसंख्यक ,बहुभाषी,बहुधर्मी है। यह विस्व का इकलौता देश है जो अपने संस्कृति से जमीनी स्तर पर जुड़ा हुआ है। दोस्तों ये राम की धरती है जो धीर गम्भीर है,यह श्री कृष्ण की धरती है यह वही धरती है जहाँ स्वामीविवेकानन्द स्वामी ने जन्म लिया हम गर्व करते है 
क्योंकी जहाँ सभी धर्म के लोग मिलकर एक साथ रहते है। हम एक ऐसे देश के नागरिक है जो इस करोना क कठिन समय भी अपने देश को नए ऊँचाई पर ले जा रहा  है।
हम एक ऐसे देश के नागरिक है जिसने दुनिया को केवल दिया है चाहे किसी भी क्षेत्र में हो हमने सिद्ध किया है की भारत विस्व को सदा दाता था है व रहेगा। समय अब फिरसे आ गया है कि हम अपने देश को फिरसे हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाये,व भारत को फिरसे विस्वगुरु बनाये। साथियों आपने कुछ और तथ्य ध्यान दीजिये।एक समय था जब भारत चीन जैसे देशों को केवल समझाता था किंतु अब चीन को हमने दिखा दिया है कि हम अब दोस्ती के साथ दुश्मनी भी अच्छी तरह से निभा सकते है।अभी हमारे विरो ने उसके कायरता से भरी हरकतों को करारा जवाब दिया है।मैं आपके साथ मिलकर उन वीर सैनिकों को नमन करता हूँ। आज यदि हम अपने आसपास देखे तो बहुत सारे लोग है जो ना होकर भी हमें सिखाते है केवल आज जरूरत है उनसे जुड़ने की। आज हमारे युवाओं को कई ऐसी पुस्तकें है जिसे पढ़ने की जरूरत है जैसे अब्दुल कलाम के द्वारा लिखा गया माय चाइल्डहुड विंग्स ऑफ फायर, स्वामीविवेकानन्द जी के बारे में पढ़ना चाहियें साथ ही साथ हमे आज गीता रामायण व बायबल,गुरुग्रंथ साहिब कुरान आदि धार्मिक पुस्तकों को ठीक ठीक अर्थ समझकर उसको अपने जीवन में उतारना चाहिये।

सबसे अच्छा सबसे प्यारा है अपना हिंदुस्तान। 
पूरे विस्व में इस जैसा और कहाँ जहान।।

इसके खातिर हम तो अपना सर्वस्व लुटा देंगे।
इसी भूमि पर हमें जीना है बनकर अच्छा इंसान।।

जिस धरा पे निर्मल गंगा युमना की धारा है बहती।
जिसके कण कण में सीता राधा है अब भी बस्ती।।

जिस भूमि पर साधु संतों ने है ध्यान लगाया।
जिस धरा पे राम भारत से दिया हमे ज्ञान।।

जहाँ सनातन धर्म मिला, मिला गीता ,वेद पुराण।
आओ मिलकर करले प्यारे उसको झुककर प्रणाम।

जिस साथियों हम नमन करते है ऐसी पवन धरा को। अब मैं आपको कुछ और तथ्यों से अवगत कराना चाहता हूँ कि आज हमें ये सोचना है कि क्या वास्तव में हम आजाद है, यदि आप
गहराई से अवगत करे तो पायेंगे कि हम आज भी गरीबी भुखमरी, बेरोजगारी व जातिवाद तथा इसके साथ नशा व आतंकवाद से घिरे हुए है जिससे आजाद होना अभी बाकी है।
मित्रों निम्न पंक्ति के द्वारा मैं कहना चाहता हूँ कि 

अभी आतंकवाद के खिलाफ 
आधा जीत हुआ है आधा अभी शेष है।

बेरोजगारी,जातिवाद, गरीबी व भुखमरी जैसी 
बीमारियों का इलाज करना अभी शेष है।।

क्या हुआ आधा काम तो कर लिया आधा कर लेंगे।
अब इन सबसे भी हम अच्छी तरह निपट लेंगे।।
क्योकि इस सबसे लड़ने के लिये हिम्मत भी है
 ये हथियार भी तो महत्वपूर्ण व विशेष है।।

विस्वास है ये जंग भी जीत जाएँगे।
अपने सपने को सच करके दिखायेंगे।।
कुछ पा चुके है कुछ पाना अभी शेष है 
आगे बढ़कर देश में कर दिखाना अभी शेष है।।

दोस्तों हमे विस्वास है कि हमे आने वाले बर्षों में अपने लक्ष्य को पाकर दिखा देंगे ये दुनिया को बता देंगे कि भारत में क्रमठो की अब भी बिल्कुल कमी नही है। भारत सामर्थवान है। आओ अब अंत में जोरदार तरीके से बोलों की हिमालय से टकराकर आवाज वापस विस्व में आवाज गूँजे।
बोलो भारत माता की।
जय 
भारत माता की 
जय
भारत माता की 
जय 
आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद व आप सभी को 74वा
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक सुभकामनाये।

प्रकाश कुमार
मधुबनी, बिहार।
9560205841

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