रविवार, 4 अक्तूबर 2020

कवयित्री शशिलता पाण्डेय जी द्वारा 'मोबाइल' विषय पर रचना

मोबाइल,
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 दुनियाँ में मोबाइल का अविष्कार,
 एक दायरे में सिमट गई अब दुनियां।
 नए तकनीक का एक चमत्कार,
 हुए औपचारिक अपनों से रिश्ते-नाते।
 बस मोबाइल से होती औपचारिक बातें,
 अपनो से  मिलना जुलना हुआ मुहाल।
 ये मोबाइल का युग भी बड़ा कमाल,
 मीलों दूरी फेशबुक बंधुओ से होती पूरी।
 जाकर घर-घर मिलना अब नही ज़रूरी,
 अपने-अपने मोबाइल पर रहते सब व्यस्त।
 बच्चे-वृद्ध और जवान होते इसके अभ्यस्त,
 सारा परिवार अब दिनभर रहता मौन।
 बार-बार उठाकर फोन मोबाइल में पूछे कौन?
 चलकर आया घर मे ही शॉपिंग बाजार, 
ऑनलाइन आर्डर कर आता घर मे समान।
बिना मोबाइल नही किसी का कोई सम्मान,
मोबाइल आधुनिक युग का एक भगवान।
इसके बिना नही दुनियां में कोई कल्याण,
जब वैश्विक महामारी कोरोना बीमारी आई।
लॉकडाउन में ऑनलाइन बच्चों की पढ़ाई,
अब सारी दुनियां चिठ्ठी-पत्री भी भूल गई।
मोबाइल बात कराए सारी खबरे झट मिल जाएं,
दूरियां पास लाये देश-विदेश से सबको जोड़े।
शादी-विवाह  हो आमंत्रण झट पहुंचे निमंत्रण,
 एक मोबाइल सारे काम शिक्षा या मनोरंजन।
पलभर में निपटाए हर काम सुबह या शाम,
 ये मोबाइल सबकी जान घर आये कोई मेहमान।
एक जादुई पिटारा जैसा करता हर काम,
हे मोबाइल देवता! तुझे सहस्त्रों बार प्रणाम।

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स्वरचित औऱ मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
 कवयित्री :-शशिलता पाण्डेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)

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