रविवार, 4 अक्तूबर 2020

कवयित्री कुमारी चंदा देवी जी द्वारा रचना

नमन मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु आलेख मेरा प्रस्तुत है- 
महात्मा गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर आयोजित गांधी अहिंसा और प्रेम अथवा जय जवान जय किसान इन दो बिंदुओं पर अपने विचार प्रस्तुत करना है मैं कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार संस्कारधानी जबलपुर से आपके बीच में अपनी रचना गद्य रूप में प्रस्तुत कर रही हूं बदलाव अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय मंच को नमन करते हुए मैं अपने शब्दों को साकार करते हैं प्रस्तुत है
 लाल बहादुर शास्त्री का जन्म विशेष मायने नहीं रखता है मायने रखता है उनके द्वारा किए गए कार्य छोटे कद के व्यक्ति साधारण सादा जीवन उच्च विचार से अपने भावों को समाज के सामने प्रस्तुत किया गांधीवादी विचारधारा का उन पर असर पड़ा गांधी और नेहरू के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में उन्होंने अपने दायित्वों को निभाएं भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री बने और जब उन्होंने पदभार ग्रहण किया तो देश की स्थिति इस तरह की थी कि कहना चाहिए कि देश को आर्थिक खाद्यान्न की परेशानियां और जवान जो देश पर की सेना में संत्री बनकर अपना दायित्व निभा रहे थे उनका जोश बढ़ाने की आवश्यकता थी क्योंकि पाकिस्तान भारत का रक्त चूसने के लिए तैयार था ऐसे में साहस की मिसाल बन कर उन्होंने एक सवाल राष्ट्र बनाने के लिए सभी जनता में भावात्मक स्थापित करने हेतु उनके मन में जो विचार आई उन्होंने 1965 में भारत-पाक युद्ध था उस दौरान एक नारा दिया भारत जय जवान जय किसान इस नारे को देश का राष्ट्रीय नारा भी कहा जाता है इस नारे के बारे में यदि शब्द काय तो कदापि अनुचित ना होंगे यह वह जोश था यह वह जोश था जो सरहद पर खड़े वाहनों को खेत में काम करने वाले किसानों की मेहनत और श्रम को दर्शाता है साथ ही देश की भीषण खाद्यान्न की जो समस्या थी उस दौरान उसको लाल बहादुर शास्त्री ने बड़े ही जनता के साथ संभाला और देशवासियों में जोश लाने के लिए प्रोत्साहन बनने के लिए यह नारा दिया इसके साथ-साथ पूरे देश ने हुंकार भरी जिससे कि उत्साह और आत्मविश्वास के कारण लोग आगे आए और अपनी परेशानियों से डटकर मुकाबला किया और देश के लिए यदि एक नेता या समाज का मार्गदर्शक प्रदर्शित करता है तो देश में जोश भरने की आवश्यकता नहीं होती अपने आप वीरता से परिपूर्ण हो जाता है और आन बान शान बनाने के लिए जो वीरता उन्होंने भरे उससे जवानों ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए मतलब बात यह है कि जवान और किसान यह दोनों व्यक्ति जो ऐसे हैं जो देश की उन्नति के लिए रक्षा के लिए कभी भी पीछे नहीं हटते हैं जो योगदान है उपलब्धियों का अमूल्य है अतुल्य है जय जवान जय किसान का नारा पक्षी का काम किया और देश की आर्थिक स्थिति को ऊंचा बनाने में सफल रहा सीमा पर खड़ा जवान सैनिक जो अपनी जान की बाजी लगा देता है देश की रक्षा के लिए उस जवान का देश प्रेम निश्चल होता है उस सैनिक के मन में ना तो पत्नी का ध्यान रहता है नमा का ध्यान रहता है ना अपने बच्चों का ध्यान रहता है उसके दिल दिमाग में सिर्फ भारत माता की रक्षा करने का ही जज्बा होता है और इस जज्बे को जगाने का काम जय जवान किनारे के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री जी ने किया लाल बहादुर शास्त्री जी ने उन भावनाओं को उन्हें इस तरह से संप्रेषित किया कि चाहे वह हिंदू सैनिक रहा हो और चाहे मुसलमान सहित रहा हूं दोनों ने ही देश प्रेम की भावना में आगे बढ़कर हिंदुस्तान की रक्षा के लिए अपनी जान लगा दी और एक कदम भी पीछे नहीं हटे सबसे आगे भारत माता की शाम को देखा और सैनिक अपने अंदर के सभी मनोभावों में कभी लालच मोह नहीं लाता है वह तो समर्पित भाव से कार्य करता है इसी तरह से हमारे अन्नदाता हैं अपने घर में रहते हैं वहां पर बोलते हैं और हम बोलते हैं हर मौसम में का सामना करते हुए हैं वह हमें हम तक पहुंचाते हैं और नहीं करते हैं जहां 1.3 लोग हैं देश के किसान की वजह से ही सब  खाद्यान्न पाते हैं भूख को शांत करते हैं
लाल बहादुर शास्त्री जी के लिए कहेंगे कि वह प्रेरक व्यक्तित्व रहे हैं और उन्होंने अपने द्वारा इतने अच्छे कार्य करके गए हैं एक छोटा सा कक्का व्यक्ति साधारण जीवन जीने वाला उच्च विचार रखने वाला हिंदुस्तान के पटल पर ही नहीं विश्व पटल पर एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत करके गया है जिसका कोई सानी नहीं है
श्रीवास्तव कुल के शिरोमणि जन्मे मुगलसराय लाल बहादुर शास्त्री भारत रत्न कहलाए पिता शारदा प्रसाद घर लिया आप अवतार रामदुलारी बात का मिला अनोखा प्यार पिता का प्यार नहीं पा सके थे नीति को मंजूर मिर्जापुर ननिहाल था नाना हजारीलाल परिणय सूत्र में बंध गए ललिता के संग लाल सुमन कुसुम दो पुत्रियां पुत्र रत्न के चार श्रीवास्तव परिवार में हो गया मंगला चार मिली उपाधी काशी विद्यापीठ जातिसूचक नाम हटाकर हुए शास्त्री विशिष्ट सत्य सरलता व सादगी पर सेवा में विलीन देशभक्ति का जज्बा ले वचन  प्रवीण 1964 में बनी भारत के सरताज कर्तव्यनिष्ठ सहरसा याद करे जब आज जय जवान जय किसान नारा हुआ भस्मासुर गए ताशकंद समझौते पर हम से हो गए दूर उनके जाने का मार्ग कोई भी आज तलक ना जान सके भारत मां के रतन मनोहर कोई ना पहचान सका उनके आदर्शों की गाथा याद करेगा हिंदुस्तान कोटि-कोटि प्रणाम करें हम जय जवान जय किसान जय जय जय हिंदुस्तान जय हिंद
 बदलाव अंतरराष्ट्रीय मंच को शत शत नमन वंदन आपके मंच पर मैं अपनी रचना प्रस्तुत कर रही हूं कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार जबलपुर मध्य प्रदेश

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें