मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

कवि रूपक जी द्वारा रचना “चमार की दुख की पीड़ा".....

चमार की दुख की पीड़ा.....

नन्हकू चमार को एक प्यारी सी बेटी थी
उसका वही बेटी गई थी खेत घास लाने को

वहां अकेला पाकर आ पहुंचा ठाकुर के चार लड़के
चारो मिलकर उसे मनभर खूब नोचा 
और सबने अपने हवस को भी मिटाया

उसकी वो दर्द भारी चीख सुनने से पहले ही 
पेड़ पौधे के साथ उसकी किस्मत भी बाहर हो गया था
और वो भी चीखते चीखते गूंगी जैसी हो गई थी

वो इतना दर्द सह ना सकी
वहीं जमीं पर गिर गई वो लाश समान
अब क्या जरूरत था उन ठाकुर के लड़कों को
छोड़कर वहीं, भाग गया सब अपने अपने घर को
घर आकर उसने ये कर्म सुनाया अपने अपने बाप को

फिर उसने वही काम किया जो करना था 
उसको समाज में अपने मान और सम्मान में
फेंक कर चंद रुपयों के टुकड़े को
बना लिया उसने अपना कुत्ता नीचे से ऊपर तक को
जिससे उसकी ही बोली भोंकने को

और इधर जब इसको होश आई तो
फिर जैसे तैसे ही घर आई वो
थी खून से लथपथ और बेसहारा ही आई वो
फिर अपनी दर्द भरी दास्तान सुनाई अपने पिता को

पिता संग बेटी भी चली उस गांव के सरपंच के पास वो
उल्टे सरपंच ने गाली देकर भगा दिया वहां से उसको

फिर वहां से कुछ दूर चलकर वो पास के थाना गए
अपना पूरा दुखड़ा सुनने से पहले ही
उल्टे लगे बरसने उसपर दरोगी जी
दिया खूब जमकर मन भर, दमभर उसको गाली


अंदर से निकला ठाकुर  फिर वो भी साथ लगे बरसने
देखो कितना हिम्मत हो गया अब चमारो को
कितना तेज बोली बोलने लगा अब ये शाला चमार
अब बदनाम करने आ गए निर्दोष पवित्र ठाकुरों को
पहले अपने बेटी का मुंह तो देखो
और इसे भी जरा आईना दिखा दो
चेहरा काली सूअर की बहन जैसी लगती है

क्या हुआ अगर जरा सा छू भी लिया इसको तो?
ठाकुर का बच्चा है खून गरम है इतना तो चलता है
कल तलक मुंह में इसके जबान नहीं था
और मेरे इशारे पर हर वक्त दूम हिलता फिरता था
आज इसका मुंह फुट आया है 
और अब बड़ी बड़ी बोली बोलने लगा है
साला, ठाकुर  से मुकाबला करने चल दिया है


साथ में दरोगा जी भी लगे उसे ही झाड़ने
घर के छप्पर पर खड़ नहीं है
खाने को दो वक्त की घर में रोटी नहीं है
और चल दिया मुंह उठाकर थाना की तरफ
थाना को अपने मामा का घर समझ रखा है क्या?

फिर एक सिपाही चलकर वहां से उसे ही
दस  गाली के साथ दो चार लाठी जमा दिया
बिक गया शासन और प्रशासन भी चंद रुपयों में 
मर गया न्याय वही का वही दम घुटकर
पुलिस भी खूब गाता रहा उसी ठाकुर की बोली
ऊंची ऊंची स्वर मर बोल बोलकर। 

और गांव वाले भी  इसका साथ छोड़कर  
उल्टा इसे है चरित्रहीन कुलटा कह कहकर
हर पल ताने मार मारकर गांव से  जाने को 
मजबुर कर दिया और गांव से भगा भी दिया।
©रुपक

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