मंगलवार, 20 अक्तूबर 2020

कवि बाबूराम सिंह जी द्वारा 'नारी शक्ति' विषय पर रचना

पावन बदलाव मंच
          साप्ताहिक प्रतियोगिता
       दिनांक-18अक्टु0से24तक
           विषय- नारी शक्ति
         प्रेष0ता0-19/10/2020
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         नारी शक्ति 

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त्याग  समर्पण  व श्रध्दा ,ममता प्यार दुलार ।
ग्रहणी मधुर मधुर महकी,घर आंगनअरू व्दार।
गृहलक्ष्मी  शुभ नारि  है ,भाग्यवती सुख सार ।।
जन-जन की जननी यही ,समग्र सृष्टि आधार।।
बहू सुता  माता  बहन ,पत्नि  योग्य सत्कार ।
अमन चैन अग जग भरे ,बाढै़ सुख परिवार।।

नारी  की  महिमा महा ,महक  उठे संसार ।
आनंदित  जग  को करे ,यही धर्म का सार।।
पालन पोषण में सबल ,सच नारी अनमोल ।
नारि बिन भोगे नरक ,संग स्वर्ग बिन तोल।।
सेवा  में  सिरमौर है ,अरू सर्वोत्तम त्याग ।
बिन नारी विस्तार ना ,जाग सके तो जाग।।

क्षमा  दया  कृपामयी ,क्यों  बेबस है  नारि ।
जागरूक  हो  यत्न  से ,इस पर करे  विचार।।
कर  न्योछावर  नारि सब ,करती नर  तैयार।
फिर  क्यो  इउससे छीनते ,जीने का अधिकार।।
जन-जन को सुख बांटती ,ना कर निज परवाह।
बदले  में बस  पा  रही , दुख दर्द और आह।।

भ्रूण  हत्या पुत्री  की , है  दहेज का शाप ।
इससे बढ़कर केअधम ,नहीं जगत में पाप।।
करे सु आदर मान सब ,सत्य धर्म के साथ ।
नारी   है  नारायणी , तभी  बनेगी  बात ।।
पावन परम पुनीत है , नित नारी उपकार ।
कहते "बाबूराम कवि " परम पूज्य है नारि।।

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बाबूराम सिंह कवि 
बड़का खुटहाँ , विजयीपुर 
गोपालगंज ( बिहार)
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