रविवार, 6 दिसंबर 2020

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थापक/मार्गदर्शन दीपक क्रांति द्वारा बेहतरीन 'प्रेम' गज़ल


जिद के आगे

इतने मजबूर हुए  उसकी ज़िद के आगे,
रब से दूर हुए उसकी ज़िद के आगे|

मायने रखती है उसकी खुशी मेरे लिए भी,
मजबूत से मजबूर हुए  उसकी  ज़िद  के आगे |

आना -जाना न था  इश्क  की गलियों  में मेरा ,
उस कूचे में  मशहूर हुए  उसकी  ज़िद  के आगे |

मरहम की जगह जब मेहंदी लगवाई उसने, 
मेरे दर्द काफूर  हुए  उसकी ज़िद  के आगे |

छलकाया जाम चश्म  से इस  कदर उसने,
नशे  से  चूर  हुए  उसकी ज़िद  के  आगे |

साथ  जीने  - मरने  की खायी  जो कसमें,
रुसवा  बदस्तूर  हुए  उसकी  ज़िद   के  आगे |

मुस्कुरा  के  जीना  सिखाया  उसी  ने,
अंगार  से  अंगूर  हुए  उसकी  ज़िद  के आगे |

इश्क  उसने भी  किया  सबसे  ज्यादा  लिहाज़ा  ,
'दीपक' बेनूर  हुए  उसकी ज़िद  के आगे  ||

दीपक क्रांति,
संस्थापक-अध्यक्ष,
बदलाव मंच

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