शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

कवयित्री गीता पाण्डेय द्वारा 'श्री कृष्ण' विषय पर रचना

श्री कृष्ण

कृष्ण उठत, कृष्ण चलत कृष्ण शाम भोर है।
 कृष्णा बुद्धि कृष्ण चित्र कृष्ण मन विभोर है।

 कृष्णा रात्रि कृष्णा दिवस कृष्णा स्वप्ना शयन हैं।
 कृष्णा काल, कृष्ण कला कृष्ण मास अयन है।

कृष्णा शब्द कृष्णा अर्थ , कृष्णा ही परमार्थ है।
कृष्ण कर्म कृष्णा भाग्य कृष्ण ही पुरुषार्थ हैं।

 कृष्ण स्नेह, कृष्णा राग कृष्णा ही  अनुराग हैं।
 कृष्ण कली कृष्ण कुसुम कृष्ण ही पराग हैं।

कृष्णा भोग कृष्ण त्याग कृष्ण तत्वज्ञान है।
कृष्ण भक्ति कृष्ण प्रेम , कृष्ण ही विज्ञान है।

 कृष्ण स्वर्ग कृष्ण मोक्ष कृष्ण परम साध्य है।
 कृष्ण जीव कृष्णा ब्रह्म कृष्ण ही आराध्य हैं।

गीता पांडे रायबरेली उत्तर प्रदेश

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