मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

शशिलता पाण्डेय जी द्वारा अद्वितीय रचना#नव वर्ष#

नमन बदलाव मंच
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच
साप्ताहिक प्रतियोगिता
दिवस:-बुधवार
दिनांक:-30/12/2020
विधा-पध्द
विषय:-नया साल नया संकल्प
          (साल 2021)
नया साल नया संकल्प
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  नया साल 2021
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नवजीवन नूतन खुशियाँ,
मुस्कुरायेंगी अपनी बगियाँ।
जब होगा 2020 का अंत,
बरसेंगी खुशियाँ अनन्त।
आगाज, नया अच्छा होगा,
सुन्दर होंगी फिर जग की रीत।
नये-नये सपनें अब, होंगे,
कोरोना काल भी जाएगा बीत।
सारी खुशियाँ अपनी होगी,
अपनी भी होगीं अब जीत ।
दुनियाँ की ये पुरानी रीत,
दुख-सुख दोंनों से करना है प्रीत।
कल तो हमारा अपना होगा,
तू बन जा अभी अपनो के मीत।
2021 लेकर खुशियों के आएगा,
मिलेंगी कोई नूतन अनुपम सौगात।
सफलता की राह में बढेंगे कदम,
वैश्विक महामारी से मिलेगी निजात।
कोरोना की भी औषधि होगी ईजाद,
फिर होंगे अपने सपने पूरे, 
2021 की क्या बात!
एक नया परिवेश मिलेगा,
घूमने-फिरने को हर देश मिलेगा।
अपनों से मिलने का संदेश मिलेगा,
अपनों को गले लगाने का आदेश मिलेगा।
नए गीत गाएंगे करेगे ईश वंदन,
अपने सम्मानित जनो का करेंगे अभिनंदन।
जलाकर आशा की एक किरण,
निश्चित करेंगे एक नूतन परिवर्तन।
उम्मीद की एक ज्वाला कर प्रज्वलित,
जीवनपथ को निरंतर करेंगे प्रशस्त।
होना ही है आगाज नूतन नया निश्चित,
2021का नूतन साल भी होगा परिवर्तित। 
एक दौर कोरोना-काल समापन,
बगिया महकेगी खुशियों से भरा जीवन।
आगाज नया निश्चित होगा कल,
बीतेगा उत्साह,उमंग में हर पल।
रौन्द्र रूप प्रकृति का कुपित,
संकल्पित होंगें करने को हम प्राश्चित।
जीवन के ये दौर चुनौतीपूर्ण,
एक सबक नया लेना है कठिन।
प्रकृति का कठोर नियम कानून,
हम फिर से ना इसको तोड़ेंगे।
हर मुश्किल में अपना हौसला,
हम कभी ना छोड़ेंगे।
जब-जब मानव ने प्रकृति को छेड़ा,
प्रकृति ने भी किया बखेड़ा।
कभी बाढ़ कभी कोरोना महामारी,
कभी डेंगू मलेरिया स्वाइन फ्लू की बारी।
निग्रह भी देगी प्रकृति प्रतिघाती,
बर्बाद न होने देंगे प्राकृतिक थाती।
ये दुर्दिन भी अब बीतेंगे,
हर महामारी से हम जीतेंगे।
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स्वरचित और मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित 
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)

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