डॉ भ्रमरपुरिया की प्रेम कविता

मैं बदनाम हो गया
आशिकों मे मेरा सबसे ऊंचा नाम हो गया,
गली, मुहल्ले, चौक, चोराहे चर्चा सरेआम हो गया।

ख्वाबों मे जिसका दीदार था करता,
उसकी होठों पर मेरा नाम आ गया।
मासूमियत से सराबोर, झील सी आंखे, 
गुलाबी होंठ, सब मुझपर मेहरबान हो गया।
आशिकों मे मेरा ऊंचा नाम हो गया।।

यारों क्या बताऊँ हाल ए दिल सत्यम का,
मुफ्त मे सबकी जुबां पर अपना नाम आ गया।
कोई कसर न रखी दुनिया वालों ने,
जी भर कर खुलेआम बदनाम कर दिया।
जिसके सपने देखा करता था,
उनकी सहेलियों मे मै सरेआम हो गया।
आशिकों मे मेरा ऊंचा नाम हो गया।।

दीवानगी है या पागलपन,
कुछ भी हो किसी के तो काम आ गया।
दिवाना हूँ पर गुमनाम हो गया।
अब मेरा किस्सा मेरे ही काम आ गया।
मुहब्बत, हसीना, उल्फत, दिलबर,
तमाम लफ्जों का गुलाम हो गया।
आशिकों मे मेरा ऊंचा नाम हो गया।
बड़ी प्यार से मैं बदनाम हो गया।।
डॉ सत्यम भास्कर भ्रमरपुरिया✍
 डायरेक्टर आयुस्पाईन हास्पिटल दिल्ली.

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