शनिवार, 25 जुलाई 2020

नित उठी प्रातः पिता पद शीश नाइये

नित उठी प्रातः पिता पद शीश नाइये 
====================

पूज्य पिता का पावन चरण सुतीर्थ धाम, 
नाम यश, उत्थान, उत्कर्ष हर्ष दाता है। 
श्रद्धा स्नेह, प्रेम नेम से नित सेई सदा, 
स्वर्ग सुख शान्ति जन -जन जग पाता है। 
कहे रामायण गीता भूले ना कदापि पिता, 
पुराण वेद शास्त्र सुश्रेष्ट बतलाता है। 
पालन पोषण प्यार देके "कवि बाबूराम "
बन सद्गुरु सब कुछ सिखलाता है। 

खुश रखने से पूज्य पिता मानस को, 
खुशियों से घर -परिवार भर जाता है। 
रह अनुशासन में जीवीत पिता के सदा, 
शुभाशीष सरस अनन्त सुख पाता है। 
करता अनादर उपहास तिरस्कार जो, 
बने नरक गामी ना चैन क़भी पाता है। पामर पतित उसे मान "कवि बाबूराम "
नित अहा! पिता का दिल जो दुखाता है। 

त्यागिये ना भूल से भी पूज्य पिता चरण, 
राग अनुराग चरणन में बढा़इये। 
पिता के रिण से उरिण होना मुश्किल है, 
सुचि उपकार प्यार मत भूल जाइये। 
पिता के तुल्य ना अमुल्य कुछ दुनिया में, 
धूल ले चरणन का फलिये -फूलाइये। 
करबध्द "कवि बाबूराम "कहे सबही से, 
नित उठी प्रातः पिता पद शीश नाइये। 
*************************
बाबूराम सिंह कवि 
ग्राम -खुटहाँ, पोस्ट -विजयीपुर (भरपुरवा) जिला -गोपालगंज (बिहार) पिन -841508
मो0 नं0-9572105032
*************************

On Sun, Jun 14, 2020, 2:30 PM Baburam Bhagat <baburambhagat1604@gmail.com> wrote:
🌾कुण्डलियाँ 🌾
*************************
                     1
पौधारोपण कीजिए, सब मिल हो तैयार। 
परदूषित पर्यावरण, होगा तभी सुधार।। 
होगा तभी सुधार, सुखी जन जीवन होगा ,
सुखमय हो संसार, प्यार संजीवन होगा ।
कहँ "बाबू कविराय "सरस उगे तरु कोपण, 
यथाशीघ्र जुट जायँ, करो सब पौधारोपण।
*************************   
                      2
गंगा, यमुना, सरस्वती, साफ रखें हर हाल। 
इनकी महिमा की कहीं, जग में नहीं मिसाल।। 
जग में नहीं मिसाल, ख्याल जन -जन ही रखना, 
निर्मल रखो सदैव, सु -फल सेवा का चखना। 
कहँ "बाबू कविराय "बिना सेवा नर नंगा, 
करती भव से पार, सदा ही सबको  गंगा। 
*************************
                       3
जग जीवन का है सदा, सत्य स्वच्छता सार। 
है अनुपम धन -अन्न का, सेवा दान अधार।। 
सेवा दान अधार, अजब गुणकारी जग में, 
वाणी बुध्दि विचार, शुध्द कर जीवन मग में। 
कहँ "बाबू कविराय "सुपथ पर हो मानव लग, 
निर्मल हो जलवायु, लगेगा अपना ही जग। 

*************************
बाबूराम सिंह कवि 
ग्राम -बड़का खुटहाँ, पोस्ट -विजयीपुर (भरपुरवा) 
जिला -गोपालगंज (बिहार) पिन -841508 मो0नं0-9572105032
*************************
मै बाबूराम सिंह कवि यह प्रमाणित करता हूँ कि यह रचना मौलिक व स्वरचित है। प्रतियोगिता में सम्मीलार्थ प्रेषित। 
          हरि स्मरण। 
*************************

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें