रविवार, 19 जुलाई 2020

देखा मैंने उनसे दिल को लगा कर.....देख लिया मैंने सबसे ये राज छुपाकर.....

वो

देखा मैंने उनसे दिल को लगा कर.....
देख लिया मैंने सबसे ये राज छुपाकर.....

और अब क्या देखना बाकी रह गया........
देख लिया मैंने उनसे दिल लगाकर........

मेरे होकर भी वो मेरे ना हो सके.......
देख लिया उन्हें मैंने दिल में बसाकर.......

उनकी नजर में मैंने कुछ करके देखा......
उनके लिए देखा सबसे नजरें चुराकर........

उनका खुशी तो नहीं मिल पाया मुझे.......
देख लिया मैंने उनको इश्क में अजमाकर.......

रूपक का अब आस  खत्म होती नहीं.......
इंतजार करता रहा उसका,राह को देखकर......
©रूपक

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें