शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

बदलाव मंच कवि व समीक्षक भास्कर सिंह माणिक कोंच जी द्वारा 'समय सबसे बलवान' विषय पर रचना

मंच को नमन
विषय - समय सबसे बलवान

जीवन में इतना रखें ध्यान
होता समय सबसे बलवान

जो करते हैं काम समय पर
होता उसका मान समय पर
वही तो चढ़ते हैं शिखर पर
जो रखते हैं नजर समय पर

मिलता नित्य सूरज से ज्ञान
होता समय सबसे बलवान

कौरव   दल  हारा   अर्जुन  से
हरण  हुआ  मृग आकर्षण  से
द्रोण लाचार  हुए एकलव्य  से
विजय मिली दधिचि अर्चन से

गाएं  युग  ने समय के गान
होता समय सबसे बलवान 

नूतन  पृष्ठ   रचे  है   समय  ने
राजा   रंक   बनाए   समय  ने
पालन करती प्रकृति समय का
तोड़े   अवरोध   को  समय  ने

हुए  सफल  धैर्य  से  धैर्यवान
होता  समय  सबसे  बलवान
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मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
भास्कर सिंह माणिक ( कवि एवं समीक्षक) कोंच
मंच को नमन
विषय-आत्मनिर्भर


जीवन में
कोई भी काम नहीं होता
छोटा या बड़ा
शर्म 
कैसी शर्म
मानव जीवन
मिला है
श्रम करने के लिए
 इसलिए
हमारे पूर्वज कहते
बनो
 आत्मनिर्भर

देश की सीमा पर
रात दिन
निडर
निर्भय
अनवरत
खड़े रहते
हिमगिरी की तरह
अडिग
वह निभाते हैं अपना कर्तव्य
अपने प्राण देकर भी
वह देते हैं संदेश
समाज को
बनो अच्छे पहरी
बनो
आत्मनिर्भर

मत फैलाना हाथ
मत झुकना अवरोधों के समक्ष
बढ़ते रहो
जो निरंतर
चलते रहते
वह पा लेते हैं
मंजिल
मत देखो मुड़कर
पीठ करते हैं कायर
जो नहीं घबराते श्रम से
वही रचते हैं नव इतिहास
उठा कर पढ़ लो ग्रंथ
शब्द शब्द
कहता है यही
बनो
आत्मनिर्भर
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मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
भास्कर सिंह माणिक (कवि एवं समीक्षक)कोंच

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