शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

कवि- आ. राजेश तिवारी "मक्खन" जी द्वारा रचना

( हिन्दी दिवस )
माथे की बिन्दी है हिन्दी, भारत माँ की शान ।
देश के बसते इसमें प्रान ।।

वैदिक वाड़्यमय की वातिन ।
वैभवमय साहित्य की नातिन ।
अवधी व्रज बुन्देली  बहिना, सबरे रस की खान ।।........१.

गाथा वीर काल का सासो ।
 जामे रचे गये थे रासो ।।
जगनिक और परमाल भाल का , यह है पवित्र निशान ।.......२

मीरा सूर का यह है गायन ।
इसमें तुलसी रची रामायन ।।
पंचमेल कबिरा की खिचडी , है साखि सबद प्रमान ।.......३

पंत , निराला और मधुशाला ।
छंद शास्त्र मणियों की माला ।।
गुप्त सुप्त साहित्य धरा का , यह ही कवियों का गान ।........४

आजादी के  जो दीवाने ।
 इसमे ही थे उनके गाने ।।
जय हिन्द जय वंदे मातरम् , का था कितना सम्मान ।...........५

राजेश तिवारी "मक्खन"
झांसी उ.प्र.

मेरे यह रचना" हिन्दी" पूर्णत: मौलिक  स्वरचित है ।

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