मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

कवि डॉ.राजेश कुमार जैन जी द्वारा रचना “- ए.पी.जे. अब्दुल कलाम"

सादर समीक्षार्थ
 बदलाव मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता। दिनांक -9:10 2020 से 13 अगस्त 2020। विषय - ए.पी.जे. अब्दुल कलाम



 आज जिन्हें दुनिया मिसाइल मैन और जनता का राष्ट्रपति नाम से भी जानती है। उनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम था। वह भारत भारतीय गणतंत्र के 11 निर्वाचित राष्ट्रपति थे। उन्हें विख्यात वैज्ञानिक, अभियंता और देश के प्रति समर्पित ईमानदार व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।
 डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का जन्म भारत के तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले में एक अति अल्प शिक्षित और निर्धन तमिल परिवार में हुआ था। इनके पिता जैनुलाब्दीन एक निर्धन नाविक थे और माँ असीमा एक सामान्य ग्रहणी थी।
    बचपन में आप अपने पिता की सहायता भी करते थे और उनका हाथ बंटाते थे। स्कूल में भी वे एक मध्यम दर्जे के विद्यार्थी थे किंतु उनकी सीखने की इच्छा शक्ति अत्यंत प्रबल थी। विशेष रुप से गणित में उनकी बहुत रूचि थी और वह उसमें कठिन परिश्रम करते थे।  
     कलाम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वर के प्राथमिक स्कूल से पूर्ण की थी। इसके इसके पश्चात उन्होंने वर्ष 1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में भौतिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1955 में आप मद्रास चले गए और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन करने लगे। उनका स्वप्न एक लड़ाकू पायलट बनने का था किंतु परीक्षा में आप नौवें स्थान पर रहे, जबकि आई.ए.एफ. ने केवल 8 परिणाम भी घोषित किए थे।
   उनका स्वप्न पूर्ण न  हो सका और वे असफल हो गए। वह निरंतर संघर्ष करते हुए अपनी सफलता के अन्धकार से बाहर निकलने में सफल रहे और उन्होंने देश को विभिन्न मिसाइलों को प्रदान किया, जिनमें अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग आदि मिसाइलें प्रमुख स्थान रखती हैं। उनकी इन असाधारण उपलब्धियों ने उन्हें सफलता के सर्वोच्च आसन पर विराजित किया और देश की प्रतिष्ठा को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया। वर्ष 1960 में स्नातक की पढ़ाई पूर्ण करने के पश्चात डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के वैमानिक विकास प्रतिष्ठान में एक वैज्ञानिक के रूप में शामिल हो गए।
   अपने कैरियर के प्रारंभिक दिनों में उन्होंने भारतीय सेना के लिए एक छोटा सा हेलीकॉप्टर तैयार किया था। वर्ष 1930 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो ) में भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च वाहन एस एल वी-3 के एक प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाए गए।
   जुलाई 1980 में पृथ्वी की कक्षा के पास रोहिणी उपग्रह को स्थापित करने में सफल रहे। जुलाई 1992 से दिसंबर 1999 तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के सचिव तथा प्रधानमंत्री के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के पद को भी आपने सुशोभित किया। अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करते हुए और अनेकों पदों को सुशोभित करते हुए 25 जुलाई 2002 से लेकर 25 जुलाई 2007 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत रहे और भारत को विश्व में एक नई पहचान आप के कारण मिली।
    विश्व के अनेक देशों ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अनेक डिग्रियां प्रदान कर अपना गौरव बढ़ाया। वर्ष 2009 में यू.एस.ए. ने आपको हूवर पदक से सम्मानित किया। वर्ष 1981 में आपको पद्मभूषण और वर्ष 1990 में पद्म विभूषण सम्मान प्रदान किया गया।
   वर्ष 1997 में भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में आपको देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
 वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने डॉ. कलाम के जन्मदिवस को विश्व छात्र दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की।
   27 जुलाई 2015 में शिलांग के एस.पी. सिटी विवेक श्याम ने बीबीसी को बताया कि एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए वह गिर गए और उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। दुर्भाग्य वश 82 वर्ष की उम्र में उनकी असामयिक मृत्यु हो गई।इस प्रकार विश्व ने एक शांति दूत और महान वैज्ञानिक को खो दिया।
   मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध अब्दुल कलाम ने सुबह 11:30 बजे आखिरी ट्वीट किया था। शिलांग जा रहा हूँ। लेबनान प्लेनेट अर्थ पर आई आई एम में एक कार्यक्रम में भाग लेने ।



डॉ. राजेश कुमार जैन श्रीनगर गढ़वाल 
उत्तराखंड

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