मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

कवयित्री डॉ भावना एन सावलिया जी द्वारा रचना “ए.पी. जे. अब्दुल कलाम"

बदलाव अंतरराष्ट्रीय मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता के लिए मेरी कविता 
दिनांक : ९/१०/२०२० से १३/१०/२०
विषय : ए.पी. जे. अब्दुल कलाम

शीर्षक : भारत के मिसाइल मैन 

१५,अक्टूबर १९३१ के शुभ दिन रामेश्वर की धरा महकी ।
भारत के जन-जन की खुशियों की चिड़ियाँ चहकी ।
निर्धन-तिमिर की झोंपड़ी में वो रोशनी लेके आये ।
अद्भुत मिसाइल की शोध से वे खुशियाँ भरके  लाये ।  
निर्धनता में मानवता का अनूठा-फूल खिला था ।
देशहित के विकास में कर्म का सुफल मिला था ।
जीवन में संघर्षों का ताज सिर पर रखते थे ।
कष्ट उर में लेकर हौंसले की उड़ान भरते थे ।
जनहित का दृढ़-संकल्प मन में बरकरार था ।
तम में आशा के दीप का अनमोल उपहार था । 
जात-पाँत के भेदभाव से जीवनांत वो दूर थे ।
बड़ों-छोटे के सम्मान-प्यार जीवन में भरपूर थे ।
पाँव जमीं पर,विकास की उड़ान थी गगन में ।
सदा रत थे कर्म-धर्म में, नेक राह की लगन में  ।
त्याग-समर्पण-कर्त्तव्य-निष्ठा की वो मिशाल थे ।
प्रेम-करुणा-क्षमा-दया की धार से उर विशाल थे ।
सत्य-सादगी, उदात्त-विचार गुणों की वो खान थे ।
भारत के कण-कण में बसे कलाम के प्राण थे । 
पद्म-भूषण,भारत-रत्न का माथे का ताज था ।
गीता, क़ुरान बाइबिल का जीवन में नाज था ।
२७, जुलाई,२०१५ को मिसाइल धरा से उठ गई ।
विज्ञान की विद्युत ज्योत हमसे क्यों रूठ गई  ?
भारत माँ के आँचल के गौरव के लाल थे ।
भारत के मिसाइल मैन गुदड़ी के लाल थे 
भारत के ऐसे वीर-सपूत अब्दुल कलाम थे ।
ऐसे युग-पुरुष को मेरे शत्-शत् सलाम है ।।२

डॉ भावना एन सावलिया 
राजकोट गुजरात


शपथ : यह रचना मेरी स्व-रचित और मौलिक है ।
डॉ भावना एन सावलिया 
राजकोट गुजरात

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें