बुधवार, 7 अक्तूबर 2020

कवयित्री शशिलता पाण्डेय जी द्वारा रचना “जब तुम्हें सोचते है”

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💐जब तुम्हें सोचते है,,,,,💐
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नम आँखे मेरी इंतजार में तेरे ,
तड़पता ये दिल जब तुम्हे सोचते है,,,,
यादे तेरी हर शाम और सवेरे,
हर हवाओं से तेरा पता पूछते है!
तेरी छवि दिल मे हर वक्त मेरे,
हम तुमसे अपनी खता पूछते है!
माना अब बहुत ठाट-बाट तेरे,
माली से फूलों का नाता पूछते है!
तू तो पुष्प चमन के थे मेरे,
हम जननी का हक जता पूछते है!
वादे थे मातृभूमि सेवा के तेरे,
यादों में तड़पती माँ क्यों बता पूछते है?
हम ममत्व की गंगा सृजनकर्ता थे तेरे,
दीदार को तड़पाना बता ये कैसी सजा पूछते है?
तेरी छवि और छाया चित्र देखकर सवेरे,
मेरी अनुभूतियों क्यो नही समझता पूछते है?
तुम ममत्व की वेदना से बेफिक्र मेरे,
मन और हृदय भर आता जब तुम्हे सोचते है!
तुम तो मेरी रगो में लहू बनके गुजरे,
हवाओ में ढूढ़ती फिजाओं में ढूढ़ती  है!
तू क्या जाने मुझपर क्या गुजरे?
हर गुजरती हवाओ से तेरा पता पूछती हूँ!
बता दे! मेरी खता लाल मेरे,
मेरी आंखों में नमी जब हम तुम्हे सोचते है!
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स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय








 

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