रविवार, 18 अक्तूबर 2020

कवि डॉ मलकप्पा अलियास महेश जी द्वारा रचना “नौ दिन नव रूप अलंकार"

मंच को नमन 

कविता :- नौ दिन नव रूप अलंकार 

माँ को सजाकर नौ
दिवस नव रूप अलंकार 
सेतो  दुर्गा होती है शोभित |
नौ दिवस नव खाद्य नैवेद्य 
करके माँ को तृप्ति हेतु |
नौ  दिवस नव फल-फूलों 
से सजाके, माँ से 
वर पाने का प्रयास करते |
शक्ति का एक अर्थ प्रेम,  
व सहनशील का 
पात्रमें भी पारंगत देवी  |
शैलपुत्री की प्रथम 
पुजा रूप विशाल हृदय 
के प्रेरणा दायक |
दोहरा रूप तो ब्रह्म 
चारिणी हो तुम दीन 
दुखियों की रक्षा करती |
है तेरा तृतीय रूप चंद्र 
घटना की दुष्ट संहार कर 
खुशी भर देती है |
कूष्मांडा तो चतुर्थ
रूप उल्लास दायिनी l
पंचम स्कन्द माता 
कहलाती कार्तिकेय 
के साथ पूजी जाती |
कात्यायनी रूप षष्टम 
किसानों को समृद्धि प्राप्त 
कर मुस्काना भर देती है |
कालरात्रि तेरा रूप है 
सप्तम दुष्ट संहारीणी बन 
कष्ट दूर कर देती है |
गौरी तो रूप का सुंदर
व कोमल स्वभाव भर 
शांति के दूत |
नवम रूप तो 
सिद्धदायनी सकल 
जीवजंतों की उद्धारिनी |
देवी तू संसार के 
जीवजंतों के रक्षक 
बनकर इस धरा पर 
पावनकर दिया कमाल |
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डॉ मलकप्पा अलियास महेश बेंगलूर कर्नाटक

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