गुरुवार, 5 नवंबर 2020

कवि स्वप्निल जैन द्वारा 'चाँद' विषय पर रचना

बदलाव मंच को सादर नमन 
शीर्षक:- चाँद का दीदार, करवाचौथ का त्यौहार।

दिनांक:- 04 नवंबर 2020
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चाँद से चाँद की बात होती है
चाँद से चाँद की मुलाक़ात होती है
जब एक चाँद से दूजे चाँद का दीदार होता है
तब करवाचौथ का त्यौहार होता है।

दिन भर का निर्जल उपवास होता है
पति की लंबी उम्र का मन में ख्वाब होता है
जीवन भर का साथ रहे
यही मन में विश्वास होता है

दिन भर मंगल गान होता है
प्रभु का गुणगान होता है
शाम को उपवास खोलने का
विधि विधान से अनुष्ठान होता है।

हाथों में छलनी होती है
पति चाँद के समान होता है
दीपक से होती है आरती
फिर चाँद का दीदार होता है।

पति के हाथों से जल ग्रहण कर
समापन उपवास का होता है
आशीर्वाद मिलता है पति से
चिरायु होने का वरदान मिलता है।

जब एक चाँद से दूजे चाँद का दीदार होता है
तब करवाचौथ का त्यौहार होता है।

रचना:- स्वप्निल जैन 
           छिन्दवाड़ा(मप्र)
(स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित रचना)

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