शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

पल दो पल के#निर्मल जैन 'नीर' जी द्वारा खूबसूरत रचना#

पल दो पल के....
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एक ही हल~
थोड़ा सा मुस्कुरा ले
पल दो पल
करो मंथन~
मोह माया के तोड़
सारे बंधन
कोई न मोल~
ये मनुष्य जीवन
है  अनमोल
क्रंदन छोड़~
कर ले दान पुण्य
मुख न मोड़
कैसा गुमान~
धरा रह जायेगा
मान सम्मान
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निर्मल जैन 'नीर'
ऋषभदेव/उदयपुर
राजस्थान

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