गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

बाबूराम सिंह कवि जी द्वारा#प्यारा होली का त्योहार#

प्यारा होली का त्योहार

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श्रध्दा स्नेह सद्भाव बढा़ता ओर परस्पर सभी में प्यार।
सद्  शिक्षा  का  प्रतीक  है  प्यारा होली  का त्योहार।।

होली हुलसित सबको करता,जीवन उमंगों  से  भरता।
दुख दर्द सबहीका हरता,नियत समय सेकभी न टरता।
होलीमेंसब पगहैधरता,अबीर गुलालसे ना कोई डरता।
नगर शहर और गांव-गांव में,सतरंगी पिचकारी झरता।

हिल-मिल सब कोई उडा़ता चहुँदिश रंगों का बौछार।
सद्  शिक्षा  का  प्रतीक  है प्यारा होली  का  त्योहार।।

ऊँचनीच,सबभेद भुलाकर मूढ़ गँवार ज्ञानीअति नागर।
समहो जाते मालिक चाकर,मिलते हैसब प्रेमसेआकर।
भरता जब रंगों की गागर,बहता है तब प्रेम का  सागर।
हर वर्ष होली आती-जाती,सभी को सच यहीं बताकर।

परम पिताकी सबसंतानें,सकलविश्व अपना  परिवार।
सद्  शिक्षा  का  प्रतीक  है प्यारा होली  का  त्योहार।। 

बसकोई सबकोगले लगाता,बैर विरोध सबदूर भगाता।
कोई नाचता कोई गाता,पूडी़  पकवान मिठाई  खाता।
होली है हर-हरको भाता,सभीसे सबकोई आके पाता।
प्यारभरा जीवन ही जगमें,सबही का है भाग्यविधाता।

अग-जग में कर्म ही सबका"बाबूराम कवि" है आधार।
सद्  शिक्षा  का  प्रतीक  है प्यारा  होली  का  त्योहार।।


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बाबूराम सिंह कवि
बड़का खुटहाँ, विजयीपुर
गोपालगंज(बिहार)
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