सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

कवयित्री इंजी शालिनी चितलांगिया जी द्वारा रचना नारी शक्ति-"कोमल है कमजोर नहीं तू"

बदलाव मंच (राष्ट्रीय एवम अंतराष्ट्रीय)साप्ताहिक प्रतियोगिता(18अक्टूबर से 24 अक्टूबर)
विषय-नारी शक्ति
नोट-ये रचना मेरे द्वारा लिखित है

*नारी शक्ति-"कोमल है कमजोर नहीं तू"*

*तुम जानते हो क्या है       नारी*......

*जिसने सारी सृष्टि संवारी* .......

*कभी है अंबे तो कभी है  दुर्गा काली*..... .

 *कभी न समझना उसे अबला बेचारी*.......

 *कभी माता कभी पत्नी कभी बहन तो कभी सखी है*........

 *हर पात्र उत्कृष्टता से निभाती है वह,जिससे परिवार सुखी है*.......

 *यह जननी भी है यह देवी पूजनीय भी है*......

*खुशियांँ सारी इनसे है घर इनसे ही शोभनीय है*.....

 *मन में करुणा, ममता, दया, प्यार भरा पड़ा है*....... 

*जिसमें पारिवारिक हित हेतु ही पूरा जीवन गढ़ा है*...

 *एक औरत आदमी के जीवन को पूरा करती है*....... 

*आदमी के जीवन को सरल व संवारा करती है*....

 *मन में दुखों का पहाड़ रखकर भी सदा मुस्कुराती है*......

 *यह कोमल कहलाने वाली नारी मुसीबत में चट्टान बन जाती है*....

 *नारी लक्ष्मीबाई है नारी सावित्री है नारी सीता है नारी गायत्री है*.....

 *नारी का सम्मान व इज्जत करने में ही सच्चे सुख की प्राप्ति है*........

*नारी तू ईश्वर का प्रतिरूप तू ही इस संसार का सार है*.....

 *तेरी कोमल काया में पलती नवजीवन की पतवार है*......

 *आंचल में समाया अंबर मन में प्रेम का अथाह सागर*...... 

*ममता की साक्षात मूरत है तू*.......

 *समर्पण की सच्ची सूरत है तू*.......

 *कोमलता का पर्याय है*......


*ममत्व  का संपूर्ण अध्याय है*........

 *छलकते आंसुओं में भावनाओं का सैलाब है*........

 *पारिवारिक हित से जुड़ा जीवन का हर एक ख्वाब है*.......

 *जिसमें माता सीता की सौम्यता है मदर टेरेसा सी आत्मीयता है*......

 *मां अंबे है जिसका शांत स्वरूप तो मां काली सी रौद्रता   है*.....

 *कभी सावित्री सी पतिव्रता है तो कभी रानी लक्ष्मीबाई की वीरांगना है*......

 *जिसकी वाणी में है लोरी का मधुर संगीत तो कहीं सिंहनी की गर्जना है*....... 

*कल्पना चावला के हौसलों की उड़ान है संसार में नारी ही साहस का प्रमाण है*....

 *एक नहीं कई रूपों में इसकी पहचान है परिवार ,संतान ,पति ही जिसका मान है*....

 *पर्वत की तरह अडिग है जो हर मुश्किल का समाधान है*..... 

*सबके दुख संभाले खुद में ऐसी नदी है मुसीबत में यह अटल चट्टान है*......

*वकील ,डॉक्टर ,इंजीनियर* 
*नेता ,वैज्ञानिक हर क्षेत्र में सामने आई है*........ 

*कोमल कहलाने वाली इस नारी ने सैनिक बनकर दुश्मनों से भी की लड़ाई है*........

 *चूड़ियां पहनने वाले हाथों ने कई अविष्कार कर दिखाए हैं*......

 *अपने साहस का परिचय देकर चंद्रमा में झंडे गाड़ कर आए हैं*.......

 *कोमल पंखों से बुलंद इरादों की ऊंची उड़ान है*.....

 *इसलिए भारत माता के रूप में इसका सम्मान है*......

*स्त्री ,पत्नी ,माता ,बहन,*
*काकी हर रूप में जो पूजनीय है*........

 *कमजोर वो कभी नहीं हो सकती जो एक नवजीवन की जननी है*.........

 *लाचार नहीं तू,बेचारी नहीं तू,तिरस्कृत नहीं तू, उपेक्षित नहीं तू*...........

 *हे ईश्वरी शक्ति !अपने अस्तित्व को पहचान क्योंकि कोमल है पर कमजोर नहीं तू*......


*इंजी शालिनी चितलांगिया* *राजनंदगांव छत्तीसगढ़*

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