सोमवार, 12 अक्तूबर 2020

कवि नारायण प्रसाद जी द्वारा रचना “डॉ.ए.पी.जे अब्दुल कलाम"

बदलाव मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता
(9/10/2020 से 13/10/2020)

शीर्षक - डॉ.ए.पी.जे अब्दुल कलाम
(भारत के पूर्व राष्ट्रपति)


स्व .डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम जी।
तह दिल से आपको मेरा सलाम जी।

जन्म लिया था 'रामेश्वरम', एक छोटे से गाँव में।
'कलाम जी' बचपन बिता था, आपका अभाव में।

बचपन में देते थे आप, अखबार घरों में।
आज चर्चा होती हैं आपका, अख़बारों में।

परिस्थितियों को आप ने ,बनाया अपना दास।
सच में कलाम जी आप तो थे, बचपन से खास।

असफलताओ से कभी नहीं हुए आप उदास।
दृढ़ इच्छाशक्ति,लगन बचपन से,थे आपके पास।

सादगी,ईमानदारी,कूट-कूट भरा था,आपके अंदर।
कलाम जी तो थे सच में,ज्ञान विज्ञान का समंदर।

आप बने थे भारत देश के सर्वोच्च नागरिक। 
आप तो थे एक लेखक,अभियंता, वैज्ञानिक।

जो बात नहीं है सूरज और चंदा में।
वो बात था खुदा के इस नेक बंदा में।

 नारायण प्रसाद
 आगेसरा (अरकार)
 जिला -दुर्ग (छतीसगढ़)

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