रविवार, 4 अक्तूबर 2020

कवयित्री सीमा गर्ग मंजरी जी द्वारा रचना (विषय-दोहा)

नमन माँ शारदे 
सीमा मंजरी के दोहे 
दोहे --
विषय भोग की लालसा,जकड़ा है संसार।
जप तप सेवा साधना,आज बने व्यापार।।

एकल सुख की चाह में, छूट रहे परिवार।
नौनिहाल से छिन रहा,अब अपनों का प्यार ।।

बना बतंगड़  बात का, देते हैं अखबार।
जनता बोलो क्या करें,बहरी है सरकार।।

रिश्ते सब धूमिल हुए,फूल बने सब खार।
हो गए अपने, पराए,  मन में पड़ी दरार।।

सीमा गर्ग मंजरी
 मेरी स्वरचित रचना
मेरठ

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