रविवार, 11 जुलाई 2021

स्मिता पाल 'साईं स्मिता', झारखंड जी द्वारा खूबसूरत रचना#

शीर्षक: बेवफ़ा तू सनम
विधा: अरुण छंद
वो नज़्म, वो ग़ज़ल, आज भी है चुभन।
वो शेर, वो गीत, बिन निभाए वचन।
दिखावे, का प्यार, वो समर्पण जतन।
आज भी, याद है, बेवफ़ा तू सनम।

दर्द का, सिलसिला, तेरे दिए सितम।
वो घाव, वो ज़ख्म, अनकही कटु वचन।
बिलखती, तड़पती, तरसती वो नयन।
भुला ना, पाऊंगी, तेरे दिए चुभन। 

बिन कहे, बेवजह, यूं मुंह फेरना।
फिर कहीं, दूसरे, का हाथ थामना।
बेवफा, तू किसी, मोड़ पर न मिलना।
यूं कभी, फिर किसी, का दिल न तोड़ना।

स्मिता पाल 'साईं स्मिता', झारखंड

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